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mahabharat 1.74.d80-116: (वैशम्पायन कहते हैं- हे राजन!) ऐसा कहकर देवता और तपस्वी ऋषिगण शकुन्तला पर पुष्पवर्षा करने लगे और उसे पतिव्रता स्त्री बताते हुए कहने लगे कि, 'देवताओं के ये वचन सुनकर पुरुवंशी राजा दुष्यंत अत्यन्त प्रसन्न हुए और पुरोहितों तथा मंत्रियों से बोले- 'आप सब लोग इस देवदूत के वचन भली-भाँति सुनिए।' 115-116.   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक d80-116
 
 
श्लोक  1.74.d80-116 
(एवमुक्त्वा ततो देवा ऋषयश्च तपोधना:।
पतिव्रतेति संहृष्टा: पुष्पवृष्टिं ववर्षिरे॥ )
तच्छ्रुत्वा पौरवो राजा व्याहृतं त्रिदिवौकसाम्॥ ११५॥
पुरोहितममात्यांश्च सम्प्रहृष्टोऽब्रवीदिदम्।
शृण्वन्त्वेतद् भवन्तोऽस्य देवदूतस्य भाषितम्॥ ११६॥
 
 
अनुवाद
(वैशम्पायन कहते हैं- हे राजन!) ऐसा कहकर देवता और तपस्वी ऋषिगण शकुन्तला पर पुष्पवर्षा करने लगे और उसे पतिव्रता स्त्री बताते हुए कहने लगे कि, 'देवताओं के ये वचन सुनकर पुरुवंशी राजा दुष्यंत अत्यन्त प्रसन्न हुए और पुरोहितों तथा मंत्रियों से बोले- 'आप सब लोग इस देवदूत के वचन भली-भाँति सुनिए।' 115-116.
 
(Vaishampayana says- O King!) Saying this, the gods and the ascetic sages started showering flowers on Shakuntala, calling her a devoted wife. King Dushyant of the Puru dynasty was very pleased to hear these words of the gods and said to the priests and ministers- 'You all should listen to the words of this angel very well. 115-116.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)