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mahabharat 1.74.d6-d8: इन्द्र ने कहा—शकुन्तले! तुम्हारा यह पुत्र विश्व सम्राट होगा। पृथ्वी पर कोई भी उसके बल, तेज और सौंदर्य की बराबरी नहीं कर सकेगा। पुरुवंश का यह रत्न सौ अश्वमेध यज्ञ करेगा। राजसूय आदि यज्ञों के माध्यम से वह अपनी समस्त सम्पत्ति ब्राह्मणों को हजारों गुना दान करेगा और उन्हें असीमित दक्षिणा देगा।   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक d6-d8
 
 
श्लोक  1.74.d6-d8 
शक्र उवाच
शकुन्तले तव सुतश्चक्रवर्ती भविष्यति॥
बलं तेजश्च रूपं च न समं भुवि केनचित्।
आहर्ता वाजिमेधस्य शतसंख्यस्य पौरव:॥
अनेकानि सहस्राणि राजसूयादिभिर्मखै:।
स्वार्थं ब्राह्मणसात् कृत्वा दक्षिणाममितां ददात्॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र ने कहा—शकुन्तले! तुम्हारा यह पुत्र विश्व सम्राट होगा। पृथ्वी पर कोई भी उसके बल, तेज और सौंदर्य की बराबरी नहीं कर सकेगा। पुरुवंश का यह रत्न सौ अश्वमेध यज्ञ करेगा। राजसूय आदि यज्ञों के माध्यम से वह अपनी समस्त सम्पत्ति ब्राह्मणों को हजारों गुना दान करेगा और उन्हें असीमित दक्षिणा देगा।
 
Indra said— Shakuntale! This son of yours will be a world emperor. No one on earth can match his strength, brilliance and beauty. This gem of the Puru dynasty will perform hundred Ashvamedha Yagyas. He will hand over all his wealth to Brahmins thousands of times through Rajasuya and other yagyas and will give them unlimited Dakshina.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)