Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.74.d58-d60: महाराज! पूर्वकाल में कुश नामक एक महान एवं धर्मात्मा ऋषि हुए थे, जो अग्निदेव के समान तेजस्वी थे। वे ब्रह्माजी से उत्पन्न हुए थे। वे महर्षि विश्वामित्र के परदादा थे। कुश के पराक्रमी पुत्र का नाम कुशनाभ था। वे अत्यन्त धर्मात्मा थे। महाराज! कुशनाभ के पुत्र गाधि थे और गाधि से विश्वामित्र का जन्म हुआ। ऐसे महान ऋषि मेरे पिता हैं और मेनका मेरी श्रेष्ठ माता हैं। | mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाराज! पूर्वकाल में कुश नामक एक महान एवं धर्मात्मा ऋषि हुए थे, जो अग्निदेव के समान तेजस्वी थे। वे ब्रह्माजी से उत्पन्न हुए थे। वे महर्षि विश्वामित्र के परदादा थे। कुश के पराक्रमी पुत्र का नाम कुशनाभ था। वे अत्यन्त धर्मात्मा थे। महाराज! कुशनाभ के पुत्र गाधि थे और गाधि से विश्वामित्र का जन्म हुआ। ऐसे महान ऋषि मेरे पिता हैं और मेनका मेरी श्रेष्ठ माता हैं।
‘Maharaj! In the past, there was a great and religious sage known as Kush, who was as glorious as another Agnidev. He was born from Brahmaji. He was the great grandfather of Maharishi Vishwamitra. Kush's powerful son's name was Kushanabh. He was a very religious man. King! Kushanabh's son was Gadhi and from Gadhi Vishwamitra was born. Such a noble sage is my father and Menaka is my excellent mother.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥