Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.74.d54: 'जो लोग परदेश में रहकर अत्यन्त दुर्बल हो गये हैं, जो दीन-दुखी हैं और मैले वस्त्र पहनते हैं, वे भी बेचारे अपनी स्त्रियों को पाकर ऐसे प्रसन्न होते हैं, मानो उन्हें कोई धन मिल गया हो। | mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'जो लोग परदेश में रहकर अत्यन्त दुर्बल हो गये हैं, जो दीन-दुखी हैं और मैले वस्त्र पहनते हैं, वे भी बेचारे अपनी स्त्रियों को पाकर ऐसे प्रसन्न होते हैं, मानो उन्हें कोई धन मिल गया हो।
'Those who have become very weak after living in a foreign land, who are wretched and wear dirty clothes, even those poor men, on getting their wives back, become as happy as if they have got some wealth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥