Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.74.d52-d53: 'सबकी अंतरात्मा सदैव पुत्र के नाम से अभिव्यक्त होती है। पिता की चाल, रूप, चाल, परिभ्रमण और लक्षण आदि जैसी होती हैं, वैसी ही चाल और समान रूप और लक्षण आदि पुत्र में भी दिखाई देते हैं। पुत्रों में अच्छे-बुरे संस्कार, गुण और आचरण आदि पिता के संपर्क से ही विकसित होते हैं। | mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'सबकी अंतरात्मा सदैव पुत्र के नाम से अभिव्यक्त होती है। पिता की चाल, रूप, चाल, परिभ्रमण और लक्षण आदि जैसी होती हैं, वैसी ही चाल और समान रूप और लक्षण आदि पुत्र में भी दिखाई देते हैं। पुत्रों में अच्छे-बुरे संस्कार, गुण और आचरण आदि पिता के संपर्क से ही विकसित होते हैं।
'Everyone's inner soul is always expressed in the name of son. The father has the same gait, appearance, movements, rotation and symptoms etc., the same gait and similar appearance and symptoms etc. are seen in the son. Good and bad manners, qualities and conduct etc. develop in sons only through contact with their father.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥