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mahabharat 1.74.d5: उस समय आकाश से उस बालक के लिए पुष्पों की वर्षा होने लगी, देवताओं के नगाड़े बजने लगे और अप्सराएँ मधुर स्वर में गाती हुई नृत्य करने लगीं। उस अवसर पर देवताओं सहित इन्द्र वहाँ आये और बोले।   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक d5
 
 
श्लोक  1.74.d5 
(तस्मै तदान्तरिक्षात् तु पुष्पवृष्टि: पपात ह।
देवदुन्दुभयो नेदुर्ननृतुश्चाप्सरोगणा:॥
गायन्त्यो मधुरं तत्र देवै: शक्रोऽभ्युवाच ह।
 
 
अनुवाद
उस समय आकाश से उस बालक के लिए पुष्पों की वर्षा होने लगी, देवताओं के नगाड़े बजने लगे और अप्सराएँ मधुर स्वर में गाती हुई नृत्य करने लगीं। उस अवसर पर देवताओं सहित इन्द्र वहाँ आये और बोले।
 
At that time, flowers rained down from the sky for that child, the drums of the gods started playing and the Apsaras started dancing while singing in sweet voices. On that occasion, Indra came there along with the gods and said.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)