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mahabharat 1.74.d48: दुष्यंत बोले- सुन्दरी! तुम्हारे यहाँ आने का क्या प्रयोजन है? मुझे बताओ। विशेषकर उस स्थिति में, जब तुम अपने पुत्र के साथ आई हो, मैं अवश्य तुम्हारा कार्य पूर्ण करूँगा; इसमें संशय नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक d48
 
 
श्लोक  1.74.d48 
दुष्यन्त उवाच
किमागमनकार्यं ते ब्रूहि त्वं वरवर्णिनि।
करिष्यामि न संदेह: सपुत्राया विशेषत:॥
 
 
अनुवाद
दुष्यंत बोले- सुन्दरी! तुम्हारे यहाँ आने का क्या प्रयोजन है? मुझे बताओ। विशेषकर उस स्थिति में, जब तुम अपने पुत्र के साथ आई हो, मैं अवश्य तुम्हारा कार्य पूर्ण करूँगा; इसमें संशय नहीं है।
 
Dushyant said- Beautiful girl! What is the purpose of your arrival here? Tell me. Especially in that condition, when you have come with your son, I will definitely accomplish your task; there is no doubt about it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)