Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.74.d37-d38: शकुन्तला ने भी हाथ जोड़कर अपने पिता को प्रणाम किया और उनकी परिक्रमा करके बोली, 'हे प्रभु! कश्यप! यदि मैंने आपको पिता मानकर अज्ञानतावश कोई कठोर या असत्य बात कही हो अथवा कोई अवांछनीय या अप्रिय कार्य किया हो, तो कृपया उसके लिए मुझे क्षमा करें।' | mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शकुन्तला च पितरमभिवाद्य कृताञ्जलि:॥
प्रदक्षिणीकृत्य तदा पितरं वाक्यमब्र्रवीत्।
अज्ञानान्मे पिता चेति दुरुक्तं वापि चानृतम्॥
अकार्यं वाप्यनिष्टं वा क्षन्तुमर्हति काश्यप।
अनुवाद
शकुन्तला ने भी हाथ जोड़कर अपने पिता को प्रणाम किया और उनकी परिक्रमा करके बोली, 'हे प्रभु! कश्यप! यदि मैंने आपको पिता मानकर अज्ञानतावश कोई कठोर या असत्य बात कही हो अथवा कोई अवांछनीय या अप्रिय कार्य किया हो, तो कृपया उसके लिए मुझे क्षमा करें।'
Shakuntala also bowed to her father with folded hands and after circling around him said, 'Lord! Kashyap! If I have said any harsh or untruthful thing or done any undesirable or unpleasant act out of ignorance thinking that you are my father, then please forgive me for that.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥