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mahabharat 1.74.d36: देवी शकुन्तला से ऐसा कहकर पौरवराज ने ऋषि के चरणों में सिर नवाया और महाबली राजा दुष्यंत के पास जाने का विचार किया।   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक d36
 
 
श्लोक  1.74.d36 
एवमुक्त्वा तु तां देवीं दुष्यन्तस्य महात्मन:॥
अभिवाद्य मुने: पादौ गन्तुमैच्छत् स पौरव:।
 
 
अनुवाद
देवी शकुन्तला से ऐसा कहकर पौरवराज ने ऋषि के चरणों में सिर नवाया और महाबली राजा दुष्यंत के पास जाने का विचार किया।
 
Having said this to Goddess Shakuntala, the prince of Paurava bowed his head at the sage's feet and thought of going to the great king Dushyant.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)