Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.74.d35: कण्व के मुख से बार-बार 'जाओ-जाओ' का आदेश सुनकर पुरुनंदन सर्वदमन ने 'तथास्तु' कहकर उनकी आज्ञा स्वीकार की और अपनी माता से कहा - 'माता! विलम्ब क्यों कर रही हो, चलो हम महल चलें।' | mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कण्व के मुख से बार-बार 'जाओ-जाओ' का आदेश सुनकर पुरुनंदन सर्वदमन ने 'तथास्तु' कहकर उनकी आज्ञा स्वीकार की और अपनी माता से कहा - 'माता! विलम्ब क्यों कर रही हो, चलो हम महल चलें।'
Hearing the repeated orders of 'go-go' from Kanva's mouth, Purunandan Sarvadaman accepted his orders saying 'Tathastu' and told his mother - 'Mother! Why are you delaying, let us go to the palace'.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥