Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.74.d25-d26: 'वहाँ दुष्यंतकुमार सर्वदमन को युवराज पद पर विराजमान देखकर तुम्हें अत्यंत प्रसन्नता होगी। देवताओं, गुरुओं, क्षत्रियों, स्वामियों और संतों की संगति विशेष फलदायी होती है। अतः हे पुत्री! तुम कुमार के साथ अपने पति के यहाँ जाकर मुझे प्रसन्न करो। मैं अपने चरणों की शपथ खाकर कहता हूँ कि मेरी आज्ञा के विरुद्ध कोई उत्तर न दोगी।' | mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दौष्यन्तिं यौवराज्यस्थं दृष्ट्वा प्रीतिमवाप्स्यसि।
देवतानां गुरूणां च क्षत्रियाणां च भामिनि।
भर्तॄणां च विशेषेण हितं संगमनं सताम्॥
तस्मात् पुत्रि कुमारेण गन्तव्यं मत्प्रियेप्सया।
प्रतिवाक्यं न दद्यास्त्वं शापिता मम पादयो:॥
अनुवाद
'वहाँ दुष्यंतकुमार सर्वदमन को युवराज पद पर विराजमान देखकर तुम्हें अत्यंत प्रसन्नता होगी। देवताओं, गुरुओं, क्षत्रियों, स्वामियों और संतों की संगति विशेष फलदायी होती है। अतः हे पुत्री! तुम कुमार के साथ अपने पति के यहाँ जाकर मुझे प्रसन्न करो। मैं अपने चरणों की शपथ खाकर कहता हूँ कि मेरी आज्ञा के विरुद्ध कोई उत्तर न दोगी।'
'You will be very happy to see Dushyantkumar Sarvadaman crowned as the crown prince there. The company of Gods, Gurus, Kshatriyas, Swamis and saints is especially beneficial. Therefore, daughter! You must go to your husband's place with Kumar to please me. I swear on my feet that you should not give me any answer contrary to my order.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥