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mahabharat 1.74.d23-d24: 'भद्रे! तुम्हें पुरुषनन्दन दुष्यंत के पास जाना चाहिए। यह सोचकर कि वे स्वयं नहीं आ रहे हैं, तुमने बहुत समय उनकी सेवा से विरत रहकर बिताया। शुचिस्मिते! अब तुम अपने हित के लिए स्वयं जाकर राजा दुष्यंत की पूजा करो।'   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक d23-d24
 
 
श्लोक  1.74.d23-d24 
तस्माद् भद्रे प्रयातव्यं समीपं पौरवस्य ह॥
स्वयं नायाति मत्वा ते गतं कालं शुचिस्मिते।
गत्वाऽऽराधय राजानं दुष्यन्तं हितकाम्यया॥
 
 
अनुवाद
'भद्रे! तुम्हें पुरुषनन्दन दुष्यंत के पास जाना चाहिए। यह सोचकर कि वे स्वयं नहीं आ रहे हैं, तुमने बहुत समय उनकी सेवा से विरत रहकर बिताया। शुचिस्मिते! अब तुम अपने हित के लिए स्वयं जाकर राजा दुष्यंत की पूजा करो।'
 
'Bhadre! You should go to Purunandan Dushyant. Thinking that he is not coming himself, you spent a lot of time staying away from his service. Shuchismite! Now, for your own benefit, go yourself and worship King Dushyant.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)