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mahabharat 1.74.d21: हे शुभ पुत्री! मेरी बात सुनो। हे शुद्ध मुस्कान वाली शकुन्तले! यह बात पतिव्रता स्त्रियों के लिए विशेष ध्यान देने योग्य है; इसीलिए मैं तुमसे कह रहा हूँ।   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक d21
 
 
श्लोक  1.74.d21 
(शृणु भद्रे मम सुते मम वाक्यं शुचिस्मिते।
पतिव्रतानां नारीणां विशिष्टमिति चोच्यते॥
 
 
अनुवाद
हे शुभ पुत्री! मेरी बात सुनो। हे शुद्ध मुस्कान वाली शकुन्तले! यह बात पतिव्रता स्त्रियों के लिए विशेष ध्यान देने योग्य है; इसीलिए मैं तुमसे कह रहा हूँ।
 
‘My auspicious daughter! Listen to my words. O Shakuntale of the pure smile! This is a matter worth paying special attention to for the faithful women; that is why I am telling you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)