Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.74.98: पूर्वजों ने पुत्र को कुल और वंश की प्रतिष्ठा बताया है, अतः पुत्र सभी धर्मों में श्रेष्ठ है। अतः पुत्र का त्याग नहीं करना चाहिए ॥98॥ | mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुलवंशप्रतिष्ठां हि पितर: पुत्रमब्रुवन्।
उत्तमं सर्वधर्माणां तस्मात् पुत्रं न संत्यजेत्॥ ९८॥
अनुवाद
पूर्वजों ने पुत्र को कुल और वंश की प्रतिष्ठा बताया है, अतः पुत्र सभी धर्मों में श्रेष्ठ है। अतः पुत्र का त्याग नहीं करना चाहिए ॥98॥
The ancestors have described the son as the prestige of the family and lineage, hence the son is the best in all religions. Therefore one should not abandon the son. 98॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥