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mahabharat 1.74.97: जो अपने समान पुत्र उत्पन्न करता है, परन्तु उसका आदर नहीं करता, उसके धन को देवता नष्ट कर देते हैं और वह ऊपर के लोकों में नहीं जाता ॥97॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  1.74.97 
स्वयमुत्पाद्य वै पुत्रं सदृशं यो न मन्यते।
तस्य देवा: श्रियं घ्नन्ति न च लोकानुपाश्नते॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
जो अपने समान पुत्र उत्पन्न करता है, परन्तु उसका आदर नहीं करता, उसके धन को देवता नष्ट कर देते हैं और वह ऊपर के लोकों में नहीं जाता ॥97॥
 
The gods destroy the wealth of one who produces a son equal to himself but does not respect him and he does not go to the higher worlds. ॥ 97॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)