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mahabharat 1.74.95: इस संसार में इससे अधिक हास्यास्पद बात और कुछ नहीं हो सकती कि दुष्ट लोग स्वयं ही सज्जनों को दुष्ट कहें ॥95॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  1.74.95 
अतो हास्यतरं लोके किंचिदन्यन्न विद्यते।
यत्र दुर्जनमित्याह दुर्जन: सज्जनं स्वयम्॥ ९५॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में इससे अधिक हास्यास्पद बात और कुछ नहीं हो सकती कि दुष्ट लोग स्वयं ही सज्जनों को दुष्ट कहें ॥95॥
 
There cannot be anything more laughable in this world than the wicked people themselves calling the good men wicked.॥ 95॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)