Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.74.92: जैसे पुण्यात्मा पुरुष दूसरों की निन्दा करने का अवसर पाकर अत्यन्त दुःखी हो जाता है, वैसे ही दुष्ट पुरुष दूसरों की निन्दा करने का अवसर पाकर अत्यन्त संतुष्ट हो जाता है ॥92॥ | mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अन्यान् परिवदन् साधुर्यथा हि परितप्यते।
तथा परिवदन्नन्यांस्तुष्टो भवति दुर्जन:॥ ९२॥
अनुवाद
जैसे पुण्यात्मा पुरुष दूसरों की निन्दा करने का अवसर पाकर अत्यन्त दुःखी हो जाता है, वैसे ही दुष्ट पुरुष दूसरों की निन्दा करने का अवसर पाकर अत्यन्त संतुष्ट हो जाता है ॥92॥
Just as a virtuous man becomes extremely distressed when he gets an opportunity to criticise others, similarly an evil man becomes very satisfied when he gets an opportunity to criticise others. ॥92॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥