Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.74.89: जो अत्यन्त सुन्दर है, वह किसी का अपमान नहीं करता; किन्तु जो असुन्दर है, परन्तु अपनी सुन्दरता का बहुत बखान करता है, मिथ्या वचन बोलता है और दूसरों को कष्ट देता है ॥ 89॥ | mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतीवरूपसम्पन्नो न कंचिदवमन्यते।
अतीव जल्पन् दुर्वाचो भवतीह विहेठक:॥ ८९॥
अनुवाद
जो अत्यन्त सुन्दर है, वह किसी का अपमान नहीं करता; किन्तु जो असुन्दर है, परन्तु अपनी सुन्दरता का बहुत बखान करता है, मिथ्या वचन बोलता है और दूसरों को कष्ट देता है ॥ 89॥
He who is extremely handsome does not insult anyone else; but he who is not handsome but talks too much about his own beauty, speaks false words and troubles others. ॥ 89॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥