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mahabharat 1.74.85: नरेश्वर! मेरा प्रभाव तो देखो। इन्द्र, कुबेर, यम और वरुण के समस्त लोकों में निरन्तर आने-जाने की मुझमें शक्ति है। 85॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  1.74.85 
महेन्द्रस्य कुबेरस्य यमस्य वरुणस्य च।
भवनान्यनुसंयामि प्रभावं पश्य मे नृप॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! मेरा प्रभाव तो देखो। इन्द्र, कुबेर, यम और वरुण के समस्त लोकों में निरन्तर आने-जाने की मुझमें शक्ति है। 85॥
 
Nareshwar! Look at my influence. I have the power to continuously come and go in all the worlds of Indra, Kuber, Yama and Varun. 85॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)