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mahabharat 1.74.83: मेनका देवताओं के बीच रहती है और देवता उसका पालन करते हैं तथा उसका आदर करते हैं (मैं उसी से उत्पन्न हुआ हूँ)। अतः हे राजा दुष्यंत! मेरा जन्म और वंश आपसे भी महान है ॥ 83॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  1.74.83 
मेनका त्रिदशेष्वेव त्रिदशाश्चानु मेनकाम्।
ममैवोद्रिच्यते जन्म दुष्यन्त तव जन्मन:॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
मेनका देवताओं के बीच रहती है और देवता उसका पालन करते हैं तथा उसका आदर करते हैं (मैं उसी से उत्पन्न हुआ हूँ)। अतः हे राजा दुष्यंत! मेरा जन्म और वंश आपसे भी महान है ॥ 83॥
 
Menaka lives among the gods and the gods follow her and respect her (I was born from her). Therefore, O King Dushyant, my birth and lineage are greater than yours. ॥ 83॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)