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mahabharat 1.74.82: शकुन्तला बोली - हे राजन! आप दूसरों के सरसों के बराबर दोष तो देखते रहते हैं, परन्तु अपनी लता के समान बड़े दोषों पर ध्यान नहीं देते।   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  1.74.82 
शकुन्तलोवाच
राजन् सर्षपमात्राणि परच्छिद्राणि पश्यसि।
आत्मनो बिल्वमात्राणि पश्यन्नपि न पश्यसि॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
शकुन्तला बोली - हे राजन! आप दूसरों के सरसों के बराबर दोष तो देखते रहते हैं, परन्तु अपनी लता के समान बड़े दोषों पर ध्यान नहीं देते।
 
Shakuntala said - O King! You keep looking at the mustard-sized faults of others but do not notice the faults which are as big as those of your own creeper.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)