श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  1.74.78 
क्व महर्षि: स चैवाग्रॺ: साप्सरा: क्व च मेनका।
क्व च त्वमेवं कृपणा तापसीवेषधारिणी॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
कहाँ हैं वे महामुनि विश्वामित्र, कहाँ हैं अप्सराओं में श्रेष्ठ मेनका, और कहाँ हैं आप जैसी तपस्वी वेशधारी दीन और दीन स्त्री?॥ 78॥
 
Where is that great sage Viswamitra, where is Menaka, the best of the apsaras, and where is a poor and wretched woman like you, dressed as a tapasvi?॥ 78॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)