Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.74.77: तुम्हारा यह कथन सम्मान के योग्य नहीं है। क्या तुम्हें यह कहते हुए शर्म नहीं आती? तुम्हें ऐसी बातें कहने में, खासकर मेरे सामने, संकोच होना चाहिए। दुष्ट तपस्वी! यहाँ से चले जाओ। 77। | mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अश्रद्धेयमिदं वाक्यं कथयन्ती न लज्जसे।
विशेषतो मत्सकाशे दुष्टतापसि गम्यताम्॥ ७७॥
अनुवाद
तुम्हारा यह कथन सम्मान के योग्य नहीं है। क्या तुम्हें यह कहते हुए शर्म नहीं आती? तुम्हें ऐसी बातें कहने में, खासकर मेरे सामने, संकोच होना चाहिए। दुष्ट तपस्वी! यहाँ से चले जाओ। 77।
This statement of yours is not worthy of respect. Are you not ashamed of saying this? You should be hesitant to say such things especially in front of me. Evil ascetic! Go away from here. 77.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥