Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.74.75: और तुम्हारे क्षत्रिय पिता विश्वामित्र भी, जो ब्राह्मण बनने को आतुर थे और मेनका को देखकर काम-वासना के वशीभूत हो गए थे, बड़े क्रूर जान पड़ते हैं।   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  1.74.75 
स चापि निरनुक्रोश: क्षत्रयोनि: पिता तव।
विश्वामित्रो ब्राह्मणत्वे लुब्ध: कामवशं गत:॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
और तुम्हारे क्षत्रिय पिता विश्वामित्र भी, जो ब्राह्मण बनने को आतुर थे और मेनका को देखकर काम-वासना के वशीभूत हो गए थे, बड़े क्रूर जान पड़ते हैं।
 
And your Kshatriya father Viswamitra too, who was eager to become a Brahmin and fell prey to lust upon seeing Menaka, seems to be very cruel. 75.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)