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mahabharat 1.74.73-74: दुष्यंत बोले- शकुन्तले! मैं तुम्हारे गर्भ से उत्पन्न इस पुत्र को नहीं जानता। स्त्रियाँ प्रायः झूठी होती हैं। तुम्हारी बात पर कौन विश्वास करेगा? तुम्हारी माता वेश्या मुझी का हृदय बड़ा क्रूर है, जिसने तुम्हें निर्माल्य के समान हिमालय के शिखर पर गिरा दिया है। 73-74॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 73-74
 
 
श्लोक  1.74.73-74 
दुष्यन्त उवाच
न पुत्रमभिजानामि त्वयि जातं शकुन्तले।
असत्यवचना नार्य: कस्ते श्रद्धास्यते वच:॥ ७३॥
मेनका निरनुक्रोशा बन्धकी जननी तव।
यया हिमवत: पृष्ठे निर्माल्यमिव चोज्झिता॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
दुष्यंत बोले- शकुन्तले! मैं तुम्हारे गर्भ से उत्पन्न इस पुत्र को नहीं जानता। स्त्रियाँ प्रायः झूठी होती हैं। तुम्हारी बात पर कौन विश्वास करेगा? तुम्हारी माता वेश्या मुझी का हृदय बड़ा क्रूर है, जिसने तुम्हें निर्माल्य के समान हिमालय के शिखर पर गिरा दिया है। 73-74॥
 
Dushyant said – Shakuntale! I do not know this son born from your womb. Women are often liars. Who will believe what you say? Your mother, the prostitute Me, has a very cruel heart, who has thrown you down like Nirmalya on the peak of the Himalayas. 73-74॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)