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mahabharat 1.74.71: 'मैंने पूर्वजन्मों में ऐसा कौन-सा पाप किया था, जिसके कारण बचपन में ही मेरे बन्धु-बान्धवों ने मुझे त्याग दिया था और इस समय हे मेरे पतिदेव, आपने भी मुझे त्याग दिया है?   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  1.74.71 
किं नु कर्माशुभं पूर्वं कृतवत्यन्यजन्मनि।
यदहं बान्धवैस्त्यक्ता बाल्ये सम्प्रति च त्वया॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
'मैंने पूर्वजन्मों में ऐसा कौन-सा पाप किया था, जिसके कारण बचपन में ही मेरे बन्धु-बान्धवों ने मुझे त्याग दिया था और इस समय हे मेरे पतिदेव, आपने भी मुझे त्याग दिया है?
 
'What sin did I commit in my previous lives, due to which I was abandoned by my relatives in childhood and at this time I have been abandoned even by you, my husband?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)