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mahabharat 1.74.62: ‘वेद जाननेवाले वैदिक ब्राह्मण अपने पुत्रों के जन्मोत्सव के समय जो वैदिक मन्त्र बोलते हैं, उन्हें भी आप जानते हैं।॥ 62॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  1.74.62 
वेदेष्वपि वदन्तीमं मन्त्रग्रामं द्विजातय:।
जातकर्मणि पुत्राणां तवापि विदितं तथा॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
‘वेद जाननेवाले वैदिक ब्राह्मण अपने पुत्रों के जन्मोत्सव के समय जो वैदिक मन्त्र बोलते हैं, उन्हें भी आप जानते हैं।॥ 62॥
 
‘You also know the Vedic mantras which are recited by the Vedic Brahmins who know the Vedas during the birth ceremony of their sons.॥ 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)