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mahabharat 1.74.61: 'अक्सर देखा जाता है कि तीर्थयात्रा से दूसरे गाँव लौटते समय पुरुष अपने पुत्रों को बड़े स्नेह से गोद में लेते हैं और उनके माथे की गंध सूंघकर प्रसन्न होते हैं॥ 61॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  1.74.61 
ननु नामाङ्कमारोप्य स्नेहाद् ग्रामान्तरं गता:।
मूर्ध्नि पुत्रानुपाघ्राय प्रतिनन्दन्ति मानवा:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
'अक्सर देखा जाता है कि तीर्थयात्रा से दूसरे गाँव लौटते समय पुरुष अपने पुत्रों को बड़े स्नेह से गोद में लेते हैं और उनके माथे की गंध सूंघकर प्रसन्न होते हैं॥ 61॥
 
'It is often seen that on returning home from a pilgrimage to another village, men take their sons in their lap with great affection and feel delighted on smelling their foreheads.॥ 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)