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mahabharat 1.74.52: 'स्त्रियाँ वह सनातन पवित्र भूमि हैं जहाँ पति की आत्मा जन्म लेती है। ऋषिगण भी बिना स्त्री के ही सन्तान उत्पन्न करने की शक्ति रखते हैं।॥ 52॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  1.74.52 
आत्मनो जन्मन: क्षेत्रं पुण्यं रामा: सनातनम्।
ऋषीणामपि का शक्ति: स्रष्टुं रामामृते प्रजाम्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
'स्त्रियाँ वह सनातन पवित्र भूमि हैं जहाँ पति की आत्मा जन्म लेती है। ऋषिगण भी बिना स्त्री के ही सन्तान उत्पन्न करने की शक्ति रखते हैं।॥ 52॥
 
‘Women are the eternal holy ground where the soul of the husband is born. Even the sages have the power to produce children without a woman.॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)