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mahabharat 1.74.5-6: वह तेजस्वी बालक, जो देवताओं के बालक के समान दिखता था, शीघ्र ही बड़ा हो गया। छः वर्ष की आयु में ही वह बलवान बालक सिंह, व्याघ्र, सूअर, भैंसे और हाथियों को पकड़कर घसीटता हुआ कण्व के आश्रम में ले आता और उन्हें आश्रम के निकट वृक्षों से बाँध देता।   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  1.74.5-6 
कुमारो देवगर्भाभ: स तत्राशु व्यवर्धत।
षड्वर्ष एव बाल: स कण्वाश्रमपदं प्रति॥ ५॥
सिंहव्याघ्रान् वराहांश्च महिषांश्च गजांस्तथा।
बबन्ध वृक्षे बलवानाश्रमस्य समीपत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वह तेजस्वी बालक, जो देवताओं के बालक के समान दिखता था, शीघ्र ही बड़ा हो गया। छः वर्ष की आयु में ही वह बलवान बालक सिंह, व्याघ्र, सूअर, भैंसे और हाथियों को पकड़कर घसीटता हुआ कण्व के आश्रम में ले आता और उन्हें आश्रम के निकट वृक्षों से बाँध देता।
 
That radiant child, who looked like a child of the gods, grew up rapidly. At the age of six, that strong boy would catch and drag lions, tigers, boars, buffaloes and elephants to Kanva's hermitage and tie them to the trees near the hermitage. 5-6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)