Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.74.49: जैसे दर्पण में अपना मुख देखकर पिता को अपनी पत्नी के गर्भ से पुत्ररूप में उत्पन्न हुई अपनी आत्मा को देखकर वैसा ही आनन्द होता है, जैसा पुण्यात्मा पुरुष को स्वर्ग प्राप्त होने पर होता है॥ 49॥ | mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे दर्पण में अपना मुख देखकर पिता को अपनी पत्नी के गर्भ से पुत्ररूप में उत्पन्न हुई अपनी आत्मा को देखकर वैसा ही आनन्द होता है, जैसा पुण्यात्मा पुरुष को स्वर्ग प्राप्त होने पर होता है॥ 49॥
'Just as one sees one's face in a mirror, similarly a father seeing his own soul born from his wife's womb in the form of a son feels the same joy as a virtuous man feels when he attains heaven.॥ 49॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥