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mahabharat 1.74.45: पति चाहे इस लोक में हो, चाहे मर गया हो, चाहे नरक में अकेला पड़ा हो, पतिव्रता स्त्री सदैव उसका अनुसरण करती है॥ 45॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  1.74.45 
संसरन्तमपि प्रेतं विषमेष्वेकपातिनम्।
भार्यैवान्वेति भर्तारं सततं या पतिव्रता॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
पति चाहे इस लोक में हो, चाहे मर गया हो, चाहे नरक में अकेला पड़ा हो, पतिव्रता स्त्री सदैव उसका अनुसरण करती है॥ 45॥
 
‘Whether the husband is in this world or is dead or is lying alone in hell, a faithful wife always follows him.॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)