Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.74.43: ‘पत्नी वह सखी या मित्र है जो एकान्त में मधुर वचन बोलती है। धार्मिक कार्यों में ये स्त्रियाँ पिता के समान अपने पतियों की हितैषी होती हैं और संकट के समय माता के समान उनके दुःखों में सहायता करके उनके कष्ट दूर करने का प्रयत्न करती हैं।॥ 43॥ | mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘पत्नी वह सखी या मित्र है जो एकान्त में मधुर वचन बोलती है। धार्मिक कार्यों में ये स्त्रियाँ पिता के समान अपने पतियों की हितैषी होती हैं और संकट के समय माता के समान उनके दुःखों में सहायता करके उनके कष्ट दूर करने का प्रयत्न करती हैं।॥ 43॥
‘The wife is the companion or friend who speaks sweet words in private. In religious activities these women are well-wishers of their husbands like fathers and in times of crisis they help them in their sorrows like mothers and try to relieve their suffering.॥ 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥