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mahabharat 1.74.41: 'पत्नी पुरुष का अर्धांगिनी है। पत्नी उसकी सबसे अच्छी मित्र है। पत्नी धर्म, अर्थ और काम का मूल है और जो पुरुष संसार सागर से पार जाना चाहता है, उसके लिए पत्नी ही मुख्य साधन है ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  1.74.41 
अर्धं भार्या मनुष्यस्य भार्या श्रेष्ठतम: सखा।
भार्या मूलं त्रिवर्गस्य भार्या मूलं तरिष्यत:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
'पत्नी पुरुष का अर्धांगिनी है। पत्नी उसकी सबसे अच्छी मित्र है। पत्नी धर्म, अर्थ और काम का मूल है और जो पुरुष संसार सागर से पार जाना चाहता है, उसके लिए पत्नी ही मुख्य साधन है ॥ 41॥
 
‘Wife is half of a man. Wife is his best friend. Wife is the root of Dharma, Artha and Kama and for a man who wants to cross the ocean of the world, wife is the main means.॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)