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mahabharat 1.74.39: पुत्र अपने पिता को पूत नामक नरक से बचाता है, इसीलिए ब्रह्माजी ने उसे पुत्र कहा है ॥39॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.74.39 
पुन्नाम्नो नरकाद् यस्मात् पितरं त्रायते सुत:।
तस्मात् पुत्र इति प्रोक्त: स्वयमेव स्वयम्भुवा॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
पुत्र अपने पिता को पूत नामक नरक से बचाता है, इसीलिए ब्रह्माजी ने उसे पुत्र कहा है ॥39॥
 
‘Son saves his father from the hell called ‘Put’, that is why Lord Brahma has called him ‘Putra’. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)