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mahabharat 1.74.38: 'इस प्रकार शास्त्रों को जानने वाले पुरुष के यहाँ जो सन्तान उत्पन्न होती है, वह वंशक्रम से मरे हुए अपने पूर्वजों का उद्धार करती है ॥38॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.74.38 
यदागमवत: पुंसस्तदपत्यं प्रजायते।
तत् तारयति संतत्या पूर्वप्रेतान् पितामहान्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
'इस प्रकार शास्त्रों को जानने वाले पुरुष के यहाँ जो सन्तान उत्पन्न होती है, वह वंशक्रम से मरे हुए अपने पूर्वजों का उद्धार करती है ॥38॥
 
'The offspring born to a man knowledgeable of the scriptures in this manner redeems his ancestors who have died through the lineage of progeny. ॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)