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mahabharat 1.74.37: 'पति ही पत्नी के गर्भ में प्रवेश करके पुत्र रूप में जन्म लेता है। यही जया (जन्म देने वाली स्त्री) का जयत्व है, जिसे प्राचीन विद्वान् लोग जानते हैं। 37॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.74.37 
भार्यां पति: सम्प्रविश्य स यस्माज्जायते पुन:।
जायायास्तद्धि जायात्वं पौराणा: कवयो विदु:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
'पति ही पत्नी के गर्भ में प्रवेश करके पुत्र रूप में जन्म लेता है। यही जया (जन्म देने वाली स्त्री) का जयत्व है, जिसे प्राचीन विद्वान् लोग जानते हैं। 37॥
 
'It is the husband who enters the wife's womb and takes birth as a son. This is the Jayatva of Jaya (the woman who gives birth), which is known by ancient scholars. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)