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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  1.74.36 
यदि मे याचमानाया वचनं न करिष्यसि।
दुष्यन्त शतधा मूर्धा ततस्तेऽद्य स्फुटिष्यति॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
'महाराज दुष्यंत! यदि मेरे उचित अनुरोध करने पर भी आप मेरी बात नहीं मानेंगे तो आज आपका सिर सैकड़ों टुकड़ों में तोड़ दिया जाएगा।
 
‘Maharaj Dushyant! If you do not listen to me even after my proper request, then today your head will be broken into hundreds of pieces.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)