श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.74.35 
किमर्थं मां प्राकृतवदुपप्रेक्षसि संसदि।
न खल्वहमिदं शून्ये रौमि किं न शृणोषि मे॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
तुम मुझे भरी सभा में नीच की भाँति क्यों अपमानित कर रहे हो? क्या मैं निर्जन वन में रो नहीं रहा हूँ? फिर तुम मेरी बात क्यों नहीं सुन रहे हो?॥ 35॥
 
‘Why are you insulting me like a lowly person in a public gathering? Am I not crying in a desolate forest? Then why are you not listening to me?॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)