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mahabharat 1.74.30: 'सूर्य, चन्द्रमा, वायु, अग्नि, अन्तरिक्ष, पृथ्वी, जल, हृदय, यमराज, दिन, रात्रि, दोनों संध्याएँ और धर्म - ये सभी मनुष्य के अच्छे-बुरे आचार-व्यवहार को जानते हैं ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.74.30 
आदित्यचन्द्रावनिलानलौ च
द्यौर्भूमिरापो हृदयं यमश्च।
अहश्च रात्रिश्च उभे च संध्ये
धर्मश्च जानाति नरस्य वृत्तम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
'सूर्य, चन्द्रमा, वायु, अग्नि, अन्तरिक्ष, पृथ्वी, जल, हृदय, यमराज, दिन, रात्रि, दोनों संध्याएँ और धर्म - ये सभी मनुष्य के अच्छे-बुरे आचार-व्यवहार को जानते हैं ॥30॥
 
'Sun, moon, air, fire, space, earth, water, heart, Yamraj, day, night, both evenings and religion - all of them know the good and bad conduct and behavior of man. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)