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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  1.74.24-25 
सा मुहूर्तमिव ध्यात्वा दु:खामर्षसमन्विता।
भर्तारमभिसम्प्रेक्ष्य क्रुद्धा वचनमब्रवीत्॥ २४॥
जानन्नपि महाराज कस्मादेवं प्रभाषसे।
न जानामीति नि:शङ्कं यथान्य: प्राकृतो जन:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वह कुछ देर तक सोचती रही, फिर दुःख और आक्रोश से भरकर उसने अपने पति की ओर देखा और क्रोधित होकर बोली - 'महाराज! आप अन्य निम्न कोटि के लोगों की तरह बिना किसी संदेह के जानबूझकर ऐसी बातें क्यों कहते हैं कि 'मैं नहीं जानता'।
 
She kept thinking for a while, then filled with grief and resentment she looked at her husband and said angrily - 'Maharaj! Why do you knowingly say such things without any doubt like other low class people that 'I do not know'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)