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mahabharat 1.74.23: क्रोध ने उसे उत्तेजित कर दिया, फिर भी उसने अपना रूप छिपा लिया और तपस्या द्वारा संचित तेज को अपने भीतर ही रख लिया॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.74.23 
आकारं गूहमाना च मन्युना च समीरिता।
तपसा सम्भृतं तेजो धारयामास वै तदा॥ २३॥
 
 
अनुवाद
क्रोध ने उसे उत्तेजित कर दिया, फिर भी उसने अपना रूप छिपा लिया और तपस्या द्वारा संचित तेज को अपने भीतर ही रख लिया॥ 23॥
 
Anger agitated her, yet she concealed her form and kept within herself the radiance she had accumulated through austerities.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)