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mahabharat 1.74.22: क्रोध और आक्रोश से उसकी आंखें लाल हो गईं, होठ कांपने लगे और वह राजा की ओर टेढ़ी निगाह से देखने लगी, मानो उसे जला डालेगी।   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.74.22 
संरम्भामर्षताम्राक्षी स्फुरमाणौष्ठसम्पुटा।
कटाक्षैर्निर्दहन्तीव तिर्यग् राजानमैक्षत॥ २२॥
 
 
अनुवाद
क्रोध और आक्रोश से उसकी आंखें लाल हो गईं, होठ कांपने लगे और वह राजा की ओर टेढ़ी निगाह से देखने लगी, मानो उसे जला डालेगी।
 
Her eyes turned red with anger and resentment, her lips started quivering and she began to look at the king with a crooked look, as if she would burn him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)