श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.74.18 
यथा मत्सङ्गमे पूर्वं य: कृत: समयस्त्वया।
तं स्मरस्व महाभाग कण्वाश्रमपदं प्रति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे महात्मन! इस समय उस वचन का स्मरण करो जो तुमने कण्व के आश्रम में मुझसे मिलते समय किया था ॥18॥
 
O great one! Please remember at this time the promise you made to me when you met me at Kanva's hermitage. ॥18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)