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mahabharat 1.74.16: राजा को ऋषि का संदेश सुनाकर सभी शिष्य आश्रम को लौट आए और शकुन्तला ने राजा के प्रति न्यायपूर्वक आदर प्रकट करते हुए अपने पुत्र से कहा -॥16॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.74.16 
निवेदयित्वा ते सर्वे आश्रमं पुनरागता:।
पूजयित्वा यथान्यायमब्रवीच्च शकुन्तला॥ १६॥
 
 
अनुवाद
राजा को ऋषि का संदेश सुनाकर सभी शिष्य आश्रम को लौट आए और शकुन्तला ने राजा के प्रति न्यायपूर्वक आदर प्रकट करते हुए अपने पुत्र से कहा -॥16॥
 
All the disciples, after conveying the sage's message to the King, returned to the Ashram and Shakuntala, expressing her respect for the King in a just manner, spoke to her son -॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)