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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  1.74.129 
स राजा चक्रवर्त्यासीत् सार्वभौम: प्रतापवान्।
ईजे च बहुभिर्यज्ञैर्यथा शक्रो मरुत्पति:॥ १२९॥
 
 
अनुवाद
महाराजा भरत प्रसिद्ध, प्रतापी और विश्व सम्राट थे। उन्होंने देवराज इंद्र के समान अनेक यज्ञ किए।
 
Maharaja Bharat was famous, majestic and a world emperor. He performed many yagnas like Devraja Indra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)