Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.74.127: महाप्रभु भरत का प्रसिद्ध चक्र सब दिशाओं में घूमने लगा। वह अत्यंत तेजस्वी, दिव्य और अजेय था। वह महान चक्र अपनी प्रचण्ड ध्वनि से सम्पूर्ण जगत को गुंजायमान कर रहा था॥127॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  1.74.127 
तस्य तत् प्रथितं चक्रं प्रावर्तत महात्मन:।
भास्वरं दिव्यमजितं लोकसंनादनं महत्॥ १२७॥
 
 
अनुवाद
महाप्रभु भरत का प्रसिद्ध चक्र सब दिशाओं में घूमने लगा। वह अत्यंत तेजस्वी, दिव्य और अजेय था। वह महान चक्र अपनी प्रचण्ड ध्वनि से सम्पूर्ण जगत को गुंजायमान कर रहा था॥127॥
 
The famous Chakra* of the great King Bharata started revolving in all directions. It was extremely luminous, divine and invincible. That great Chakra kept resonating the entire world with its loud sound.॥ 127॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)