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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 125
 
 
श्लोक  1.74.125 
तामेवमुक्त्वा राजर्षिर्दुष्यन्तो महिषीं प्रियाम्।
वासोभिरन्नपानैश्च पूजयामास भारत॥ १२५॥
 
 
अनुवाद
अपनी प्रिय रानी से ऐसा कहकर ऋषि दुष्यंत ने उन्हें भोजन, पेय और वस्त्र आदि से सम्मानित किया।
 
Having said such words to his beloved queen, the sage Dushyant honoured her with food, drinks and clothes etc.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)