Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.74.124: 'प्रिये! विशाल नेत्रों वाले! तुमने क्रोध में आकर मुझसे बड़े अप्रिय वचन कहे हैं, परंतु वे सब वचन तुम्हारे मुझ पर अत्यन्त प्रेम के कारण कहे गए हैं। अतः हे शुभे! मैंने तुम्हारे उन सब अपराधों को क्षमा कर दिया है॥ 124॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 124
 
 
श्लोक  1.74.124 
यच्च कोपितयात्यर्थं त्वयोक्तोऽस्म्यप्रियं प्रिये।
प्रणयिन्या विशालाक्षि तत् क्षान्तं ते मया शुभे॥ १२४॥
 
 
अनुवाद
'प्रिये! विशाल नेत्रों वाले! तुमने क्रोध में आकर मुझसे बड़े अप्रिय वचन कहे हैं, परंतु वे सब वचन तुम्हारे मुझ पर अत्यन्त प्रेम के कारण कहे गए हैं। अतः हे शुभे! मैंने तुम्हारे उन सब अपराधों को क्षमा कर दिया है॥ 124॥
 
'Dear! Huge-eyed! You have said very unpleasant words to me in anger, but all those words have been said because of your immense love for me. Therefore, Shubh! I have forgiven all those offences.॥ 124॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)