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mahabharat 1.74.123: यदि तुम इस प्रकार शुद्ध न होतीं, तो लोग यही समझते कि तुमने स्त्री होकर कामवश मुझसे सम्बन्ध किया है और मैंने भी कामवश होकर तुम्हारे पुत्र को राजा बनाने की शपथ ली है। हम दोनों के धर्मसम्बन्ध पर कोई विश्वास न करता; इसीलिए यह उपाय सोचा गया है॥123॥   |   mahabharat अध्याय 1.74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 74: शकुन्तलाके पुत्रका जन्म, उसकी अद्‍भुत शक्ति, पुत्रसहित शकुन्तलाका दुष्यन्तके यहाँ जाना, दुष्यन्त-शकुन्तला-संवाद, आकाशवाणीद्वारा शकुन्तलाकी शुद्धिका समर्थन और भरतका राज्याभिषेक  »  श्लोक 123
 
 
श्लोक  1.74.123 
मन्यते चैव लोकस्ते स्त्रीभावान्मयि संगतम्।
पुत्रश्चायं वृतो राज्ये मया तस्माद् विचारितम्॥ १२३॥
 
 
अनुवाद
यदि तुम इस प्रकार शुद्ध न होतीं, तो लोग यही समझते कि तुमने स्त्री होकर कामवश मुझसे सम्बन्ध किया है और मैंने भी कामवश होकर तुम्हारे पुत्र को राजा बनाने की शपथ ली है। हम दोनों के धर्मसम्बन्ध पर कोई विश्वास न करता; इसीलिए यह उपाय सोचा गया है॥123॥
 
‘If you were not purified in this way, people would have thought that you, being a woman, had entered into a relationship with me out of lust and I, too, being under the influence of lust, had taken the oath to make your son the king. No one would have believed in the religious relationship between us; that is why this method was thought of.॥ 123॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)